AI बदल रहा है हायरिंग का चेहरा: Cognizant अब गैर-STEM प्रतिभाओं को भी दे रहा है मौका

By: Anjon Sarkar

On: Monday, October 27, 2025 5:51 AM

Cognizant AI hiring
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Cognizant AI hiring का नया दृष्टिकोण – आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से खुल रहे हैं गैर-STEM ग्रेजुएट्स के लिए अवसरों के दरवाजे

आज जब दुनिया भर की बड़ी टेक कंपनियाँ नौकरियों में कटौती कर रही हैं और कार्यों को ऑटोमेशन के हवाले कर रही हैं, वहीं Cognizant ने एक अलग रास्ता चुना है। कंपनी के भारतीय मूल के सीईओ रवि कुमार एस का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंसानों की जगह नहीं ले रहा, बल्कि उनकी क्षमता को कई गुना बढ़ा रहा है और इससे non-STEM graduates यानी गैर-तकनीकी पृष्ठभूमि वाले युवाओं के लिए भी नए अवसर बन रहे हैं।

रवि कुमार का कहना है कि AI एक ऐसा टूल है जो मानव मस्तिष्क की शक्ति को “एम्प्लीफाई” कर सकता है, न कि उसे प्रतिस्थापित करने के लिए बना है। उन्होंने कहा, “AI मानव क्षमता का विस्तार कर रहा है, यह किसी को हटाने की रणनीति नहीं है।”

 Cognizant का बदलता हायरिंग पैटर्न

Cognizant अब अपनी पारंपरिक STEM (Science, Technology, Engineering, Mathematics)-केंद्रित भर्ती नीति से आगे बढ़कर लिबरल आर्ट्स स्कूलों और कम्युनिटी कॉलेजों से भी भर्ती कर रहा है। रवि कुमार ने Fortune से बातचीत में कहा, “हम अब गैर-STEM ग्रेजुएट्स को भी हायर करेंगे। मैं लिबरल आर्ट्स स्कूलों और कम्युनिटी कॉलेजों जा रहा हूँ।”

करीब 3.5 लाख कर्मचारियों वाली यह कंपनी मानती है कि AI के चलते अब काम की प्रकृति बदल रही है। पहले जहां हर तकनीकी विभाग में कोडिंग एक्सपर्ट की जरूरत होती थी, अब वही विभाग anthropology, psychology, sociology, और journalism जैसे क्षेत्रों के विशेषज्ञों के लिए भी नए रास्ते खोल रहे हैं।

रवि कुमार कहते हैं कि AI ने काम के बीच के हिस्से को संभाल लिया है, लेकिन “अंतिम सत्यापन और मानवीय समझ” अभी भी इंसानों के पास ही है। इसका मतलब है कि अब कंपनियाँ “problem solvers” के साथ-साथ “problem finders” की भी तलाश कर रही हैं।

 गैर-STEM प्रतिभाओं के लिए नई उम्मीदें

Cognizant का यह रुख उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणादायक है जो यह सोचते हैं कि टेक्नोलॉजी में करियर बनाने के लिए सिर्फ इंजीनियरिंग या कंप्यूटर साइंस की डिग्री चाहिए। कंपनी अब ऐसे लोगों को भी अवसर दे रही है जिनके पास विश्लेषण, संवाद, और रचनात्मक सोच की क्षमता है।

रवि कुमार का कहना है कि “AI काम को नया आकार दे रहा है। अब सवाल यह नहीं है कि कौन कोड लिख सकता है, बल्कि यह है कि कौन सही समस्या पहचान सकता है।”

यह विचार उस धारणा को तोड़ता है कि AI नौकरियों को खत्म करेगा। इसके विपरीत, Cognizant यह दिखा रहा है कि तकनीक मानव क्षमता को प्रतिस्थापित नहीं बल्कि उसका विस्तार कर सकती है।

 कर्मचारियों के लिए नए सीखने के रास्ते

Cognizant सिर्फ नई भर्ती पर नहीं, बल्कि अपने वर्तमान कर्मचारियों के लिए भी mid-career transitions और apprenticeship programs पर जोर दे रहा है। कंपनी का “Work, Earn, and Learn” मॉडल कर्मचारियों को काम करते हुए सीखने और नए AI-आधारित रोल्स के लिए तैयार होने का अवसर देता है।

कंपनी ने विश्वविद्यालयों और Merit America जैसे संगठनों के साथ साझेदारी की है ताकि कर्मचारी अपने करियर में बदलाव लाते समय नौकरी छोड़े बिना नई स्किल्स सीख सकें। यह पहल lifelong employability यानी आजीवन रोजगार क्षमता को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

 AI और नेतृत्व में परिवर्तन

रवि कुमार के अनुसार, AI सिर्फ तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि नेतृत्व के तरीके को भी बदल रहा है। अब नेता सिर्फ डेटा पर नहीं, बल्कि बहुआयामी अंतर्दृष्टियों पर निर्णय ले रहे हैं। उन्होंने कहा, “AI विभिन्न विषयों की अंतर्दृष्टियों को जोड़ता है और नेतृत्व को तेज़ और बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।”

आज की कंपनियों में चार पीढ़ियों के लोग काम कर रहे हैं, जिनकी जरूरतें और सोच अलग-अलग हैं। ऐसे में Cognizant का यह दृष्टिकोण आधुनिक नेतृत्व और सामाजिक जिम्मेदारी दोनों को एक साथ जोड़ता है।

 AI: एक अवसर, न कि डर का कारण

जहाँ अधिकतर टेक कंपनियाँ automation और job cuts की दिशा में बढ़ रही हैं, वहीं Cognizant का मॉडल बताता है कि कैसे AI को एक “leveller” के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, न कि एक “limiter” के रूप में।

यदि यह रणनीति सफल होती है, तो यह पूरे IT सेक्टर के लिए एक नई राह बन सकती है — जहाँ इंसान और मशीन साथ मिलकर भविष्य की कार्यसंस्कृति को आकार देंगे।

 निष्कर्ष

Cognizant का यह दृष्टिकोण दिखाता है कि तकनीकी प्रगति का अर्थ केवल ऑटोमेशन नहीं, बल्कि मानव क्षमता का पुनर्निर्माण है। जब कंपनियाँ विविधता, नवाचार और मानवीय बुद्धि को साथ लेकर चलती हैं, तो वे न केवल अपने व्यवसाय को बल्कि पूरे समाज को भी सशक्त बनाती हैं।

“AI इंसानों की जगह नहीं ले रहा — यह हमें बेहतर, बुद्धिमान और अधिक मानवीय बनने में मदद कर रहा है।”


🛈 अस्वीकरण (Disclaimer):
इस लेख में दी गई जानकारी सार्वजनिक रिपोर्ट्स, Fortune और Financial Express जैसी विश्वसनीय मीडिया स्रोतों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सूचनात्मक है। किसी भी परिवर्तन या स्पष्टीकरण के लिए संबंधित आधिकारिक स्रोतों का संदर्भ लें।

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