
विज्ञान और तकनीक की दुनिया पर भू-राजनीति का असर
आज का दौर तेजी से बदलता जा रहा है। जहां एक ओर विज्ञान, तकनीक और नवाचार (STI) नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षा से जुड़ी चिंताएँ इस क्षेत्र की दिशा तय कर रही हैं। OECD (Organisation for Economic Co-operation and Development) की नवीनतम Science, Technology and Innovation Outlook 2025 रिपोर्ट बताती है कि अब देश अपनी विज्ञान और तकनीकी नीतियों को केवल विकास तक सीमित नहीं रख रहे, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक हितों के साथ भी जोड़ रहे हैं।
विज्ञान, तकनीक और नवाचार नीति बन रही है राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा
पहले जहां विज्ञान और तकनीक का उद्देश्य सीमाओं के पार सहयोग बढ़ाना था, अब स्थिति बदल रही है। देशों की नीतियों में “सुरक्षा” एक प्रमुख पहलू बन चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 तक दुनियाभर में लगभग 250 शोध सुरक्षा नीतियाँ लागू की जा चुकी हैं, जो 2018 की तुलना में लगभग दस गुना अधिक हैं। इतना ही नहीं, जिन देशों के पास ऐसी नीतियाँ हैं उनकी संख्या भी 12 से बढ़कर 41 हो गई है।
OECD के महासचिव मैथियास कॉरमैन का कहना है कि असली चुनौती सुरक्षा और खुलेपन के बीच सही संतुलन बनाने की है। अगर सुरक्षा बहुत कम हो तो संवेदनशील शोध लीक हो सकता है, और अगर बहुत अधिक हो जाए तो नवाचार की रफ्तार धीमी पड़ जाती है। इसलिए सरकारों को ऐसे उपाय अपनाने चाहिए जो न केवल देश के हितों की रक्षा करें बल्कि वैश्विक सहयोग और वैज्ञानिक प्रगति को भी प्रोत्साहित करें।
अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग पर दिखने लगा असर
कभी विज्ञान और नवाचार सीमाओं से परे मानवता के हित में एकजुट प्रयास का प्रतीक थे। लेकिन अब भू-राजनीतिक तनावों का असर सहयोग पर भी साफ दिख रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 1970 में OECD देशों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग से तैयार वैज्ञानिक प्रकाशनों की हिस्सेदारी मात्र 2% थी, जो 2023 में बढ़कर 27% हो गई। हालांकि अब यह वृद्धि धीमी पड़ रही है, जिससे संकेत मिलता है कि वैश्विक सहयोग का रुझान प्रभावित हो रहा है।

विज्ञान और तकनीक में बढ़ रहा है रणनीतिक निवेश
रिपोर्ट यह भी बताती है कि दुनिया भर की सरकारें अब ऊर्जा, रक्षा और उन्नत तकनीकी क्षेत्रों में रणनीतिक निवेश को बढ़ा रही हैं। पिछले दस वर्षों में सार्वजनिक अनुसंधान एवं विकास (R&D) खर्च में ऊर्जा क्षेत्र के लिए 76% और रक्षा अनुसंधान के लिए 75% की वृद्धि हुई है। यह वृद्धि सामान्य R&D खर्च की तुलना में लगभग दोगुनी है।
इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग और उन्नत चिप तकनीक जैसे क्षेत्रों में भी देशों ने निगरानी और सुरक्षा उपायों को कड़ा किया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संवेदनशील ज्ञान और तकनीक किसी अनधिकृत हाथों में न जाएं, जिससे राष्ट्रीय हितों को खतरा हो सकता है।
विज्ञान और कूटनीति का नया रूप
आज “विज्ञान कूटनीति” (Science Diplomacy) देशों के बीच संबंधों का एक नया आधार बन चुकी है। जहां पहले वैज्ञानिक सहयोग का उद्देश्य ज्ञान साझा करना था, वहीं अब यह राष्ट्रीय हितों को प्रोजेक्ट करने का माध्यम भी बन गया है। देशों के बीच सहयोग अब केवल वैज्ञानिक उद्देश्यों पर नहीं बल्कि रणनीतिक दृष्टिकोण पर भी आधारित है।
भविष्य की दिशा: सुरक्षा और नवाचार के बीच संतुलन
OECD की रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि आने वाले वर्षों में विज्ञान और तकनीक की नीतियाँ और भी अधिक सुरक्षा-केन्द्रित होंगी। लेकिन इसके साथ यह चेतावनी भी दी गई है कि अगर यह रुझान बहुत आगे बढ़ा, तो वैश्विक नवाचार और साझा चुनौतियों पर सामूहिक प्रगति की गति धीमी हो सकती है।
जैसा कि रिपोर्ट में कहा गया है, हमें “संतुलन” की जरूरत है—ऐसी नीतियाँ जो नवाचार की भावना को बनाए रखें, सहयोग को प्रोत्साहित करें और साथ ही संवेदनशील जानकारी की रक्षा भी करें। यही वह रास्ता है जो हमें सतत विकास, स्वास्थ्य सुधार, जलवायु लक्ष्यों और डिजिटल रूपांतरण की दिशा में आगे बढ़ा सकता है।
निष्कर्ष: विज्ञान और तकनीक के नए युग की शुरुआत
बदलते भू-राजनीतिक माहौल ने विज्ञान, तकनीक और नवाचार नीति को एक नया चेहरा दिया है। अब यह केवल प्रगति का नहीं, बल्कि रणनीति और सुरक्षा का भी सवाल बन गया है। लेकिन यदि दुनिया ने संतुलन और सहयोग का रास्ता चुना, तो विज्ञान अब भी मानवता के लिए उम्मीद की सबसे बड़ी किरण बना रह सकता है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह लेख OECD की Science, Technology and Innovation Outlook 2025 रिपोर्ट पर आधारित है। प्रस्तुत जानकारी का उद्देश्य केवल शैक्षणिक और सूचनात्मक है। इसमें दिए गए विचार रिपोर्ट और संबंधित बयानों से लिए गए हैं तथा लेखक का उद्देश्य किसी संस्था या देश के प्रति पक्षपात दिखाना नहीं है।





