
भारत का ऑटोमोबाइल बाजार इस अक्टूबर में मानो नई अक्टूबर 2025 ऑटो रिटेल सेल्स वृद्धि भर गया। जहां सितंबर का महीना थोड़ा सुस्त दिखाई दिया था, वहीं अक्टूबर 2025 ने पूरे इंडस्ट्री के लिए एक नया रिकॉर्ड बना दिया। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर में देश की ऑटो रिटेल सेल्स में 40.5% की जबरदस्त वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। यह न सिर्फ एक शानदार वापसी है, बल्कि भारत के ऑटो रिटेल इतिहास का सुनहरा अध्याय बन गया है।
अक्टूबर 2025 ऑटो रिटेल सेल्स वृद्धि: फेस्टिव सीजन और जीएसटी 2.0 ने बदली तस्वीर
सितंबर 2025 का शुरुआती तीन हफ्ते जीएसटी 2.0 के बदलावों की वजह से शांत रहे थे, लेकिन जैसे ही त्योहारों का मौसम शुरू हुआ और टैक्स कट्स का असर दिखाई देने लगा, बाजार में फिर से रौनक लौट आई। FADA के अनुसार, अक्टूबर में यह “रीबाउंड” किसी दौड़ की तरह था — जहां दबी हुई मांग ने फेस्टिव मूड और टैक्स में राहत के साथ मिलकर रिकॉर्ड बिक्री को जन्म दिया।
FADA के अध्यक्ष सी. एस. विग्नेश्वर ने कहा कि “अक्टूबर 2025 भारतीय ऑटो रिटेल के लिए ऐतिहासिक महीना रहेगा, जब सुधार, त्योहार और ग्रामीण उछाल ने मिलकर उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया।”
दो-व्हीलर और पैसेंजर व्हीकल्स ने दिखाया दमदार प्रदर्शन
अक्टूबर के महीने में लगभग हर सेगमेंट ने बेहतरीन प्रदर्शन किया, लेकिन दो-व्हीलर और पैसेंजर व्हीकल्स (PVs) ने तो जैसे बिक्री के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए।
- टू-व्हीलर सेगमेंट ने 51.76% की साल-दर-साल वृद्धि दर्ज की और 31.5 लाख यूनिट्स की बिक्री की।
- पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट 11.35% बढ़कर 5.57 लाख यूनिट्स तक पहुंच गया, जो अब तक का सर्वाधिक आंकड़ा है।
इसके अलावा, कमर्शियल व्हीकल (CV) सेगमेंट में 17.7% की वृद्धि दर्ज हुई, जबकि थ्री-व्हीलर सेगमेंट ने 5.4% की बढ़त हासिल की। ट्रैक्टर बिक्री में भी 14.2% की और कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट में 30.5% की साल-दर-साल वृद्धि दर्ज की गई।
यह सब दर्शाता है कि भारत का ऑटो सेक्टर सिर्फ शहरों में नहीं, बल्कि गांवों और छोटे कस्बों में भी तेजी से बढ़ रहा है।

ग्रामीण भारत बना विकास का इंजन
FADA के अनुसार, इस बार बिक्री की सबसे प्रेरक कहानी रही — “भारत की आत्मा” यानी ग्रामीण बाजारों का उभार। ग्रामीण भारत ने इस बार असली ग्रोथ इंजन की भूमिका निभाई है।
अच्छे मानसून, बढ़ी हुई कृषि आय और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश ने गांवों में खरीद क्षमता को मजबूत किया। नतीजतन, ग्रामीण पैसेंजर व्हीकल्स की बिक्री शहरी इलाकों की तुलना में तीन गुना तेज़ी से बढ़ी, जबकि ग्रामीण टू-व्हीलर सेल्स ने शहरी दरों की तुलना में लगभग दो गुना वृद्धि दर्ज की।
यह केवल मौसमी ट्रेंड नहीं है, बल्कि यह संकेत है कि भारत का ऑटो डिमांड मैप स्थायी रूप से बदल रहा है — अब असली ग्रोथ शहरों से ज्यादा गांवों से आ रही है।
जीएसटी कट ने आसान की गाड़ी खरीदने की राह
FADA ने इस ऐतिहासिक उछाल का श्रेय GST 2.0 सुधारों को भी दिया है। खासकर, छोटी कारों पर जीएसटी को घटाकर 18% करने के फैसले ने पहली बार गाड़ी खरीदने वाले ग्राहकों के लिए दरवाजे खोल दिए हैं।
इस टैक्स कट ने वाहन स्वामित्व को पहले से कहीं ज्यादा सस्ता और सुलभ बना दिया। त्योहारों के दौरान जब बाजार में उत्साह पहले से ही चरम पर था, तब इस ‘अफोर्डेबिलिटी बूस्ट’ ने ग्राहकों के मन में भरोसा और जोश दोनों भर दिया।
अक्टूबर 2025 ऑटो रिटेल सेल्स वृद्धि: आर्थिक आत्मविश्वास की मिसाल
यह उछाल सिर्फ बिक्री के आंकड़ों की कहानी नहीं है, बल्कि यह भारत की अर्थव्यवस्था के भीतर चल रही नई ऊर्जा और आत्मविश्वास का प्रतीक है। FADA के अनुसार, अक्टूबर में हासिल की गई 40.5% वृद्धि इस बात का संकेत है कि देश के उपभोक्ता दोबारा खर्च करने के लिए तैयार हैं, खासकर तब जब नीतियां उनके हित में हों।
इस महीने का यह उछाल यह भी दर्शाता है कि जब नीति, भावना और ग्रामीण समृद्धि एक साथ आती हैं, तो भारतीय ऑटो सेक्टर वैश्विक स्तर पर नई मिसाल कायम कर सकता है।
भविष्य की दिशा: सुधारों और ग्रामीण शक्ति पर टिकी उम्मीदें
ऑटो इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि अगर यही गति बरकरार रही, तो भारत आने वाले महीनों में ऑटोमोबाइल बिक्री में नया विश्व रिकॉर्ड बना सकता है।
जीएसटी में राहत, ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मजबूती और लगातार बढ़ती इंफ्रास्ट्रक्चर गतिविधियां आने वाले समय में इस क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत हैं।
अक्टूबर 2025 को न केवल एक रिकॉर्डतोड़ महीना कहा जा सकता है, बल्कि यह वह समय है जब भारतीय उपभोक्ता, उद्योग और नीति — तीनों एक तालमेल में आगे बढ़े।
Disclaimer:
इस लेख में दी गई सभी जानकारियाँ FADA (Federation of Automobile Dealers Association) द्वारा जारी आधिकारिक डेटा और रिपोर्ट्स पर आधारित हैं। वाहन बिक्री के आंकड़े, टैक्स नीतियाँ और बाजार की स्थिति समय-समय पर बदल सकती है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि किसी भी आर्थिक निर्णय से पहले आधिकारिक स्रोतों से जानकारी की पुष्टि करें।
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